Friday, May 25, 2007

पोस्टमैन पर निबंध और पड़ोसी पर



पोस्टमैन पर निबंध और पड़ोसी पर
आलोक पुराणिक


अब वो वाली बात नहीं रही, जैसी पुराने निबंधों में थी। हालांकि वैसी बात अब कहीं भी नहीं रही, जैसी थी। जब वैसी बात थी, तब भी सब यही बात करते थे, अब वैसी बात कहां रही।
खैर, मसला बात का नहीं है, निबंधों का है। कैसे-कैसे निबंध इम्तिहानों में आया करते थे। गाय पर, पोस्टमैन पर, पड़ोसी पर, यात्रा पर। इधर मामला कुछ पेंचात्मक हो गया है। नयी चाल के बच्चों को पुरानी टाइप के निबंध बताओ तो उनकी समझ में नहीं आते। अब कल ही एक बच्चे को पोस्टमैन के बारे में बारे में बता रहा था। बच्चे ने पूछा-पोस्टमैन क्या होता है। मैंने कहा, जो मनीआर्डर लेकर आता है। उसने आगे पूछा-मनीआर्डर क्या होता है। मैंने बताया जब पहले लोग शहर कमाने जाते थे, तब अपने गांव मनीआर्डर के जरिये रुपये भेजते हैं। उसने बताया कि अब तो समझदार लोग देश से बाहर जाते हैं।
फिर उसने मुझे मनीआर्डर का नया मतलब समझाया कि जेब में अगर मनी होता है, तो आपके आर्डर पर हर चीज हो सकती है। जेब में मनी हो, तो सारी चीजें आर्डर में दिखायी पड़ती हैं। वरना हर चीज से नाराजगी होती है।
मनीआर्डर पर निबंध कैंसल किया। फिर मैं आया गाय पर।
गाय हमारे बहुत काम आती है, मैंने बच्चे को बताया।
हमारे काम नहीं आती, वो तो उनके काम आती है, जो उसका चारा खा जाते हैं। हम क्या करेंगे गाय का-बच्चे ने पूछा।
नहीं बेटे, हम गाय का दूध पीते हैं-मैंने समझाया।
झूठ, दूध तो हम मदर डेयरी का पीते हैं-उसने खंडन किया।
पर मदर डेयरी पर दूध गाय से आता है-मैंने समझाया।
तो यूं कहो कि मदर डेयरी के काम आती है गाय। हमें क्या मतलब गाय से-बच्चे ने डिक्लेयर किया।
यूं गाय पर निबंध कैंसल हुआ।
फिर पड़ोसी पर निबंध शुरु किया।
मैंने समझाया कि पड़ोसियों का हमारी जिंदगी में बहुत महत्व है।
हां, पुलिस के इश्तिहारों में भी लिखा होता है पड़ोसियों पर ध्यान दें, वह आतंकवादी भी हो सकता है। इस तरह से हम पड़ोसी पर ध्यान दें

और अगर वह आतंकवादी हो, तो हमें भी बहुत फायदा हो सकता है, क्योंकि सुना है कि आतंकवादी बहुत नोट कमाते हैं-बच्चे ने अपना विश्लेषण पेश किया।
नहीं बेटा, हमें पड़ोसियों के बारे में इस तरह से नहीं समझना चाहिए-मैंने उसे समझाया।
तो किस तरह से समझना चाहिए-उसने फिर पूछा।
देखो, हमारे पड़ोसी होते हैं, हमारे पास कई लोग रहते हैं-मैंने उसे समझाने की कोशिश की।
कहां कोई रहता है, मिसेज गुप्ता, मिसेज शर्मा, मिसेज अग्रवाल और इनके मिस्टर भी सुबह से ही चले जाते हैं अपने काम-धंधे पर। इनके यहां तो कोई और आकर रहता है, आया या फिर कोई और, तो इन्हे पड़ोसी मानकर इनका ख्याल रखना चाहिए-बच्चे ने फिर पूछा।
हां, ऐसा ही मान लो-मैंने समझाने की कोशिश की।
पर मिसेज गुप्ता ने मिस्टर गुप्ता की पिटाई उस दिन इसलिए की थी कि वह अपनी पड़ोस वाली आया का बहुत ख्याल रख रहे थे। तो इसका मतलब यह हुआ है कि हमें पड़ोसी का ध्यान रखना चाहिए, बहुत ज्यादा नहीं-बच्चा पूछ रहा है।
हां, बेटा ज्यादा ध्यान नहीं रखना चाहिए-मैंने अंतिम तौर पर समझाया।
इस तरह से पड़ोसी पर निबंध खत्म हुआ।
बताइए अब कैसे और किस विषय पर निबंध लिखा जाये।
आलोक पुराणिक एफ-1 बी-39 रामप्रस्थ गाजियाबाद-201011
मोबाइल--9810018799

5 comments:

संजय बेंगाणी said...

मास्साब पर लिखने को कहें, फिर नदी-नाले व कौए तथा मोर भी है. डॉक्टर, वकील को क्यों छोड़ दिया? :)

Pramod Singh said...

यही सब करते रहिये!.. बार-बार याद दिलाइये कि बच्‍चा लोग से संवाद स्‍थापित करना पाकिस्‍तान से संवाद स्‍थापित करने का बनिस्‍बत कहीं ज्‍यादा मुश्किल काम है!

Udan Tashtari said...

आप भी न!!! इतना सा बच्चा और उसे इतने जटील विषयों पर निबंध लिखने को दे रहे हो!! कुछ तो बच्चे पर रहम खाओ. :)

अरुण said...

आलोक भाइ बच्चॆ को पिज्जा कार्नर,डोनीनोज,पी.वी आर,किसी पसंद के हीरो हीरोईन पर लिखने दो ना काहे अपने ज्ञान का आलोक मे बच्चे को प्रताडित कर रहे हो,कही आप पर मानसिक प्रताडना का केस फ़ेस कर दिया तो...?

Shrish said...

अमां कैसे मुश्किल विषय दे दिए जी, ब्रिटनी स्पीयर्स, ऐश्वर्य राय या फिर आईपॉड आदि पर लिखने को देते तो बच्चे को दिक्कत न होती। :)