Saturday, May 19, 2007

अमिताभजी का च्यवनप्राश, अमिताभजी के नेता

अमिताभजी का च्यवनप्राश, अमिताभजी के नेता
आलोक पुराणिक
मैं बहुत यकीन करता था अमिताभ बच्चनजी की बात का। और तो और मैंने ब्यूटी क्रीम भी वही लगायी, जिसकी सिफारिश अमिताभ बच्चन करते थे। पर अब समझ में आया कि मैं ब्यूटीफुल क्यों नहीं हुआ। यूपी के चुनावों में मुलायम सिंहजी का जो हाल हुआ, उसे देखकर लगता है अमिताभजी के सारे बयानों के साथ एक बयान अटैच कर दिया जाये-इस बयान की सारी बातें, घटनाएं और पात्र काल्पनिक हैं। हर सीरियल वगैरह से पहले इस तरह का कुछ देना पडता है। और अमिताभजी तो आइटमों की सेल का अनंत सीरियल चलाते हैं।
अंकल आप तो कहते थे कि बकौल अमिताभ बच्चन, मुलायम सिंह के यूपी में जुर्म है कम। फिर पब्लिक ने जुर्म कम करने वाले नेता को क्यों नहीं चुना-एक बच्चा पूछ रहा है।
पब्लिक का टेस्ट बदल गया है। उसे जुर्म चाहिए, ताकि रात का खौफ, मुर्दे की मीटिंग, कब्रिस्तान की लाइफ, क्राइम पोफाइल जैसे टीवी कार्यक्रम बन सकें और पब्लिक का मनोरंजन हो सके। पब्लिक बोर नहीं होना चाहिए, इसलिए वह जुर्म में कमी नहीं चाहती-मैंने उसे समझाने की कोशिश की।
पर अमिताभजी तो यह भी कह रहे थे कि पुनर्जन्म यदि हो, तो यहीं यूपी में हो। अमिताभजी खुद यूपी में आने का आफर दे रहे थे, फिर भी पब्लिक नहीं पिघली-बच्चा पूछ रहा है।
पब्लिक यूं डर गयी कि इस जन्म में अमिताभजी को टीवी, होर्डिंग से लेकर अखबार-पोस्टरों तक में देख रहे हैं। जिस आइटम की सेल हो, उसी में अमिताभजी को देख रहे हैं। अब अगले जन्म मे भी अमिताभजी को यहीं देखेंगे, तो खौफ खाकर मर जायेगे। अब हमेशा यूपी वाले ही क्यों झेलें, अगली बार अमिताभजी तमिल, तेलुगु, मलयालम फिल्मों के एक्टर बनें-मैंने समझाने की कोशिश की।
पर इसका मतलब तो यह हुआ कि अब अमिताभजी की किसी बात का यकीन नहीं करना चाहिए। अब तो उस वाले च्यवनप्राश के मामले में भी अमिताभजी की बात नहीं माननी चाहिए-बच्चा कह रहा है।
नहीं च्यवनप्राश के बारे में दिये गये बयान और नेताओं के बारे में दिये गये बयानों में फर्क होता है। च्यवनप्राश के बारे में तो आदमी सोच-समझकर बोलता है, नेताओं के बारे में तो जो मन चाहे सो बोल दिया। यही अमिताभजी ने किया होगा-मैं बच्चे को समझाने की कोशिश कर रहा हूं।
मैं समझ गया कि नेताओं पर कोई सीरियस नहीं होता, च्यवनप्राश के मामले में ही सब सीरियस होते हैं-बच्चा कह रहा है।
मैं आश्वस्त हूं कि बच्चे को समझ में आ गया।
आलोक पुराणिक मोबाइल-09810018799

8 comments:

अरुण said...

"उसे जुर्म चाहिए, ताकि रात का खौफ, मुर्दे की मीटिंग, कब्रिस्तान की लाइफ, क्राइम पोफाइल जैसे टीवी कार्यक्रम बन सकें और पब्लिक का मनोरंजन हो सके"सही है भाइ आप ने सही नब्ज पकडी है नही तो इन एहसान फ़रामोश लोगो को ये भी याद नही यहा मुलायम मेरा ये है वो है ,बस मुलायम विपक्ष का नेता है ये बिना कहे याद कर लिया,अब अमिताभ को दुसरे जनम के लिये दुसरी जगह ढूढ ही लेनी चाहिये

संजय बेंगाणी said...

सही कहा :) :)

Sanjeet Tripathi said...

हमरा मन ताली बजाय का होवत है इहै पढ़ के

sunita (shanoo) said...

हाँ आलोक भाई एकदम सत्य वचन,..नेताओं की बात का कोई भरोसा नही किया जा सकता,..वोट लेने के लिये वो भी च्यवनप्राश से कम नजर नही आते...बहुत ही उपयोगी लगते है, बाद मेंम असलियत का पता चलता है...वैसे आपको अभिनेता और नेता में क्या फ़र्क नजर आ रहा है...मेरे खयाल से दोनो ऐक ही सिक्के के दो पहलू है...ऐक मन्च पेर दूसरा दुनिया के रंग मन्च पर...दोनो की ही बाते काल्पनिक है,..
आपने बहुत अच्छा लिखा है अब जरा बच्चे को ढ़ंग से समझा दिजिए,...

सुनीता चोटिया(शानू)

Shrish said...

हम्म अमिताभ जो बोले वो कम। :)

Jagdish Bhatia said...

बड़े भैया को हम भी इक पाती लिखे रहे आलोक जी। आप पढ़ेंगे तो हमे अच्छा लगेगा।
http://aaina2.wordpress.com/2007/05/17/up-sholey/

Udan Tashtari said...

भई, आप बच्चों को समझाते बहुत अच्छा हो. समझ आ जाता है. लगता है कहीं पढ़ाते जरुर होगे आप. मात्र लेखक यह काम नहीम कर सकता. वैसे तो क्रिम काम कर गई है, और कितना ब्यूटीफूल दिखना है, महाराज!! :) नाम बताना जरा क्रिम का, हमौ ट्राई कर लेवें.

परमजीत बाली said...

आलोक पुराणिक जी,्बहुत खूब लिखते है आप। वैसे अमिताभ जी तो वही बोलते है जो पीछे से निर्देशक बुलवाता होगा। क्यूँकि सारी उमर दूसरो के डा्यलग बोल-बोल कर उन्हे आदत जो पड़ गई है। इस लिए वह सोचते नही सिर्फ बोलते है।