Wednesday, May 9, 2007

सद्दाम और चार कट्टे

सद्दाम और चार कट्टे
आलोक पुराणिक
करीब तीस सालों से एक खबर परमानेंट अखबारों में देख रहा हूं, और लोग तो शायद तीस सालों से भी ज्यादा से देख रहे होंगे-थानाध्यक्ष गश्त पर मय फोर्स जा रहे थे। फोर्स ने झाडियों में बैठे बदमाशों को डकैती की योजना बनाते हुए देख लिया। मौके पर थानाध्यक्ष ने बदमाशों को ललकारा। जवाब में बदमाशों ने फायरिंग शुरु कर दी। इसके जवाब में थानाध्यक्ष ने बहादुरी से मुकाबला किया। मौका-ए-वारदात पर बदमाश मारे गये। चार कट्टे बरामद हुआ। थानाध्यक्ष की पदोन्नति की सिफारिश अफसरों ने की है।
उधर गुजरात में फर्जी एनकाउंटरों में गुजरात के सच्ची के आईपीएस पुलिस अफसर डी डी वंजारा अंदर हो गये हैं।
ये भी वैसे ही थानाध्यक्ष हैं, जिनका जिक्र बरसों से रिपोर्टों र्में होता रहता है।
जब मैं पत्रकार था, तो एक थानेदार ऐसी विज्ञप्ति लेकर बार-बार आते थे, शायद वह अब आईपीएस हो कर गुजरात में डी डी वंजारा हो गये हैं।
एक बार मैंने उनसे कहा-महाराज रिपोर्ट में जहां आप झाडियां बता रहे हैं, वहां तो बिल्डरों ने कब्जा करके प्लाट काट कर बेच लिये हैं।
थानेदार ने कहा-मालूम है, वहां मेरे प्लाट हैं। बिल्डर भी मैं ही हूं।
तब आप कैसे कह रहे हैं कि वहां झाडियां है, जो चीज वहां है ही नहीं, उसे आप वहां कैसे बता रहे हैं-मैंने पूछा।
उन्होने बताया कि अब होने को तो कट्टे भी हमारे पास नहीं हैं, पर क्या हम कट्टे भी नहीं दिखायें-थानेदार ने पूछा।
बात में दम है, अब कट्टे न दिखायें, तो क्या तोप दिखायें। कट्टा सस्ता सुंदर और टिकाऊ होता है। एक कट्टा एक हजार मुठभेडों में काम देता है। अमेरिकी मिसाइलें पानी मांग जायें, पुलिस के हुनर को देखकर। एक ही कट्टे से हजारों निपट रहे हैं।
वैसे अपना सुझाव है कि जो नर-रत्न इधर गुजरात से निकल रहे हैं, उनकी जगह जेल नहीं है। पुलिस अफसर वंजारा साहब तो अमेरिका को बतौर तोहफा दिये जाने चाहिए। बल्कि पहले ही दे दिये जाने चाहिए थे। सद्दाम को मारने की फजीहत से बुश बच जाते। वंजारा साहब के नेतृत्व में रिपोर्ट यूं बनती। जेल लाक अप के पास से वंजारा साहब गुजर रहे थे। उन्होने सद्दाम को डकैती की योजना बनाते हुए देख लिया। मौके पर वंजारा ने सद्दाम को ललकारा।............ मौका-ए-वारदात से सद्दाम और चार कट्टे बरामद हुए।
वंजारा साहब, प्लीज चले ही जाइए, अमेरिका बुश के पास, अपनी सी सोहबत में रहेंगे। आप बुश को कुछ सिखायेंगे, कुछ वो आपको सिखायेंगे। एनकाउंटर करना आप सिखा दीजिये, और मारने के बाद बेशर्म-स्माइल का काउंटर लगाना बुश आपको सिखा देंगे।
आलोक पुराणिक 09810018799

4 comments:

Udan Tashtari said...

वैसे तो बंजारा एंड पार्टी आऊट सोर्सिंग का दफ्तर भारत में ही खोल लें, अमेरीका से काफी काम मिल जायेगा. :)

बढ़िया लगा लेख.

अरुण said...

आलोक जी काहे गरीब मार करते हो बंजारा और गुजरात के पीछे तो ढेरो मिडिया और एन जी ओ पडे है चलो अपन किसी और को तलाशते है

देवेश वशिष्ठ ' खबरी ' said...

जनाब आपकी ही कमी खल रही थी, सो आप भी आ गये।
आपके लेख में काबिलेगौर बात यह है, कि हमेशा थानाध्यक्ष को कट्टे ही क्यों दिखते हैं?,
और फिर चार ही क्यों?
बताना।

Shrish said...

बढ़िया लेख, सद्दाम को मारने वाला प्लान अच्छा है।