Thursday, July 19, 2007

बिप्स के लिप्स की टिप्स

बिप्स के लिप्स की टिप्स..........
आलोक पुराणिक
उस टीवी चैनल का रिपोर्टर कुछ दिनों से कुछ ज्यादा ही मेहरबान दिख रहा है। उसने तीसरी बार मेरी प्रशंसा की। प्रशंसा को लेकर अपना फंडा यह है कि अगर कोई एक बार प्रशंसा करे, तो इसे शिष्टाचार मानना चाहिए।
दूसरी बार प्रशंसा लिफ्टाचार की वजह से की जा सकती है। अगर किसी के कार-स्कूटर पर लिफ्ट चाहिए, और लगातार चाहिए, तो इस तरह की प्रशंसा आम तौर पर कर दी जाती है।
पर तीसरी बार की प्रशंसा में भ्रष्टाचार को सूंघना चाहिए। मैं भ्रष्टाचार को सूंघने लगा। मैंने पूछा-गुरु क्या खेल है। फोकटी में प्रशंसा क्यों।
वह बोला-जी आपने जितने आइडिये मुझे मजाक-मजाक में दिये थे, उन सब पर हमारे टीवी चैनल ने प्रोग्राम बना लिये हैं। सारे के सारे हिट जा रहे हैं। कुछ और आइडिये दीजिये ना।
क्या मतलब-मैंने पूछा।
देखिये हमारे बास का कहना है कि जितने भी घटिया टाइप लेखक हैं, उन सबके पास हिट टीवी प्रोग्रामों के लिए बहुत ही कारगर आइडिये हैं। सो सर आपको पकड़ा है-वह बिलकुल भक्ति भाव से बोला।
उसके मुंह पर छाई सच्चाई देखकर मुझे लगा कि उसने यह बात सच में मेरे सम्मान में ही कही है। सो साहब, इस खाकसार ने कुछ और आइडिये उस टीवी चैनल को दिये हैं। आप भी गौर फरमायें-
बाबी चार्मिंग की गुड मार्निंग
बाबा इधर टीवी पर बहुत हो लिये हैं। अब बाबी चाहिए। कुछेक स्मार्ट बाबियों की सख्त दरकार हैं। ये स्मार्ट बाबियां अगर ये बतायें कि जीवन क्षण –भंगुर हैं, तो कई दर्शक इस क्षण को ही जीवन का सार्थक क्षण मानकर देखेंगे। बल्कि इसमें कुछ अमेरिकन कन्याओं को बतौर अध्यात्म गुरु पेश किया जाये। कार्यक्रम का नाम हो- बाबी चार्मिंग की गुड मार्निंग ।
अमेरिकन बाबी को लाने से प्रोग्राम कुछ अपमार्केट बनेगा। क्या है कि देसी बाबाओं से मार्केट डाऊन मार्केट हो जाता है। नहीं चलेगा।
इस प्रोग्राम में क्या होगा, जी वही होगा, जो और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में होता है।
थोड़ा सा सत्य-सत्य, बाबाजी के प्रचचनों ने हमे इतना सुखी बनाया-यह बताते हुए बाबाजी के कुछ भृत्य, फिर अंत में बाबीजी के कुछ नृत्य।

बिप्स के लिप्स के टिप्स
यह प्रोग्राम बिपाशा बसु पेश करेंगी। या जो लड़की पेश करे, उसका नाम बिपाशा रख दिया जाये। बिपाशा को अपमार्केट इलाकों में यही कहा जाता है-बिप्स।
वह ब्यूटी की टिप्स बतायेंगी, सिर्फ मर्दों को।
कमर का साइज कम करने के लिए करेले का जूस टमाटर के छिलकों में मिलाकर खायें, पानी की कैलोरी कम करने के लिए उसे उस स्पेशल छलनी से छानें, जिसका निर्माता यह प्रोग्राम स्पांसर करेगा।
बताओ साइज, ले जाओ प्राइज-यह कांटेस्ट इस प्रोग्राम में चलाये जायेगी।
इसमें पूछा जायेगा कि बताओ बिपाशा की जीन्स का साइज क्या है 30, 32, 36, 38, जिस दर्शक का उत्तर सही होगा, उसे बिपाशा अपनी एक जीन्स बतौर गिफ्ट देंगी, स्पेशल प्राइज पर सिर्फ पांच हजार रुपये पर सिर्फ।
आप ही बताइए। प्रोग्राम चलेगा या नहीं।
आलोक पुराणिक मोबाइल -09810018799

11 comments:

Udan Tashtari said...

अरे भाई, लिख लिख कर प्रोग्राम चलवा देंगे बस इतना बताओ:

कमर का साइज कम करने के लिए करेले का जूस टमाटर के छिलकों में मिलाकर खायें, पानी की कैलोरी कम करने के लिए उसे उस स्पेशल छलनी से छानें, जिसका निर्माता यह प्रोग्राम स्पांसर करेगा।


---ये सच है क्या?? भाई, छ्लनी वाले को जानते हो, खरीद कर रख लो. जब डिनर खाने पर आयेंगे आपके घर, तब ले लेंगे. बहुत आभार होगा और साधुवाद अलग से बोनस में. :)

अनूप शुक्ला said...

प्रोग्राम् चलेगा क्या दौड़ेगा बशर्ते संवाद् आलोक् पुराणिक् से लिखवायें जायें। यह् टिप्पणी पहली है लिहाजा शिष्ट् है। :)

अरुण said...

ये गुरुदेव की स्पेशल छलनी है,जिससे छन छन कर ही इतने अच्छे व्यंग बाहर आते है,स्मीर भाई हम उसी को उठाने के जुगाड मे है.अगर हाथ लग गई तो कभि कभाक आप कॊ भी उधार दे दिया करेगे...:)

Gyandutt Pandey said...

हमारी आपके प्रति सतत प्रसंशा शिष्टाचार>लिफ्टाचार के रास्ते भ्रष्टाचार में तो नहीं गिनी जायेगी! :)

काकेश said...

आइडिये तो धांसू हैं आपके.सोच रहा हूँ एक चैनल मैं भी खोल ही लूँ.

Tarun said...

आलोकजी, लिखा तो बहुत खूब है लेकिन साईज मर्दों की जींस के दे दिये हैं।

जोगलिखी संजय पटेल की said...

मुझे सारे बाबा इस कार्यक्रम को रूकवाने के लिये राष्ट्रपति भवन तक मोर्चा निकालते नज़र आ रहे हैं

bhuvnesh said...

कहीं टीवी में इतना व्यस्त न हो जाईयेगा कि आपके पाठक आपको नारद पर खोजते ही रह जायें......

Sanjeet Tripathi said...

हमारे टी वी चैनल, फ़ंडेबाज़ टी वी के सभी कार्यक्रमों का लेखन अधिकार आपको ही दिए जाते हैं, कृपया अपने फ़ंडो की फ़ाईल लेकर पहुंच जाएं!!

Shrish said...

बिल्कुल हिट होंगे साब, मैं तो बोलता हूँ कि आप अपना ही टीवी चैनल शुरु कर दो - अगड़म बगड़म टीवी, बहुत चलेगा।

और हाँ टीवी पर मुख्य संपादक के पद के लिए मेरी सेवाएँ पेश हैं। :)

परमजीत बाली said...

अलोक जी,आप हँसी-हँसी मे कितनी अनमोल बात बता गए हैं-
" अगर कोई एक बार प्रशंसा करे, तो इसे शिष्टाचार मानना चाहिए।
दूसरी बार प्रशंसा लिफ्टाचार की वजह से की जा सकती है। अगर किसी के कार-स्कूटर पर लिफ्ट चाहिए, और लगातार चाहिए, तो इस तरह की प्रशंसा आम तौर पर कर दी जाती है।
पर तीसरी बार की प्रशंसा में भ्रष्टाचार को सूंघना चाहिए।"

वैसे आप तो बिना चैनल के ही छाए हुए हैं। बहुत बढिया व्यग्य लिखते हैं।पढ कर दिल खुश हो जाता है।