Wednesday, August 1, 2007

AWARA MASIHA ALIAS SANJAY DUTT , SAWAN

आवारा मसीहा उर्फ संजय दत्त और सावन
आलोक पुराणिक
दिल्ली के परम फूं-फां इंगलिश मीडियम स्कूल की पंद्रह-सोलह बरस की बालिका पूछ रही है-अंकल ये रेडियो पर गाना आ रहा है-सावन में चुनरिया उड़ी जाये। सावन माने क्या वेरी फनी-सावन।
देखो, सावन को यूं समझो कि जुलाई –अगस्त में जब बारिश आती है, तो उसे सावन कहा जाता है-मैंने उसे समझाने की कोशिश की।
तो बारिश तो कभी-कभार नवंबर,दिसंबर में भी हो जाती है, तो उसे सावन क्यों नहीं कहते-बालिका पूछ रही है।
देखो, ज्यादा इधर-उधर की बात मत करो। सावन भारतीय महीना सिस्टम का एक महीना होता है। जैसे भारतीय महीने होते हैं, सावन, चैत, भादों, वगैरह-वगैरह-मैं बालिका को बता रहा हूं।
अंकल आपको सारे भारतीय महीनों के नाम याद हैं-बालिका पूछ रही है।
नहीं-मैंने शरमाते हुए बताया।
वैसे कोई पढ़ा-लिखा आदमी सारे भारतीय महीने के नामों को नहीं बता सकता। जो बता सकता हो, उसे पिछड़ा ही माना जायेगा।
आपको बाकी महीनों के बारे नहीं पता, सिर्फ सावन ही क्यों याद है-बालिका ने पूछा।
सावन का नाम तो इसलिए याद है कि इस पर करीब 700 फिल्में बनी हैं, सावन को आने दो, सावन-भादों.....। फिल्मी डाइरेक्टरों ने कभी इस तरह की फिल्में नहीं बनायी बैसाख या चैत को आने दो या माघ-पूस, इसलिए ये महीने पब्लिक में लोकप्रिय नहीं हो पाये-मैंने समझाने की कोशिश की।
तो क्या वो ही आइटम लोकप्रिय होते हैं, जिन्हे फिल्में दिखायें-बालिका पूछ रही है।
हां, बेटे, शरतचंद्र का नावेल परिणीता अब धुआंधार इसलिए बिक रहा है,क्योंकि इस पर फिल्म बन गयी है। परिणीता उपन्यास के कवर पर सैफ अली का फोटू बना हुआ है। विष्णु प्रभाकरजी की कृति आवारा मसीहा और धुआंधार बिक सकती है, अगर उसके कवर पर संजय दत्त का फोटू बना दिया जाये, मशीनगन हाथ में लिए हुए। जिसके लपेटे में वो छह साल के लिए अंदर हो लिये। फिल्मों के बगैर यहां किसी का भला नहीं हो सकता.। जरुरत है कि रामगोपाल वर्मा बनायें रामगोपाल वर्मा का बैसाख, या राजश्री प्रोडक्शन वाले बनायें-इस माघ-पूस में हम आपके हैं कौन-मैंने समझाने की कोशिश की।
अंकल चुनरी का मतलब क्या होता है-बालिका पूछ रही है।
चुनरी समझो कि एक पीस आफ क्लाथ होती है, जिसे लड़कियां पहनती हैं-मैंने समझाने की कोशिश की।
पर मेरी फ्रेंड तो टाप –जीन्स पहनती हैं, व्हाट चुनरी, वेरी फनी-बालिका ने बताया।
बेटा तुम नहीं तो तुम्हारी मां पहनती होंगी चुनरी, उनकी चुनरी देख लो-मैंने आगे समझाने की कोशिश की।
पर मम्मी भी टाप और जीन्स पहनती हैं। व्हाट चुनरी और यह सावन में ही क्यों लहराती है, व्हाई नाट इन अदर मंथ्स-बालिका आगे पूछ रही है।
बेटे क्योंकि फिल्म वाले चुनरिया सावन में ही लहराते हैं, इसलिए और मंथ्स में चुनरिया नहीं लहरायी जाती। समझने की कोशिश करो ना-मैंने समझाने की कोशिश की।
क्या अंकल, कुछ तो आप समझा नहीं पा रहे हैं, हर चीज में तो आप फिल्म वालों का हवाला देते हैं, तो आपसे पूछने से बेहतर है कि मैं किसी फिल्म वाले से ही पूछूंगी-बालिका गुस्सा होकर चली गयी है।
इधर मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि बालिका को चुनरी और सावन के बारे में कैसे समझाऊं।
आलोक पुराणिक मोबाइल-09810018799

11 comments:

Gyandutt Pandey said...

बड़े स्तरीय लोगों से आपका मिलना है. फूं-फां स्कूल की किशोरियों में आपकी पैठ है. बनते ज्योतिषाचार्य हैं और 12 महीनों के नाम नहीं मालूम!
अब बुरा न मानें - मासूम सा सवाल है - कौन से महीने में आप पैदा हुये? वैशाख में तो नहीं?

Udan Tashtari said...

कैसे मास्साब हैं? छोटे छोटॆ बच्चों की जिज्ञासा नहीं शांत कर पाते-हम तो सोच रहे थे कि अब आपको कॉलेज में पढ़ाने भेजा जाये, मगर कुछ समय रुक ही जायें तो ठीक. :)

-वैसे सावनिया चुनरिया खूब लहराई भाई!!

Sanjeeva Tiwari said...

फन्‍नी बेबी, आलोक 'अंकल' को क्‍यों परेशान कर रही हो, चलो मेरे बाईक के पीछे बैठो मैं बताता हूं !

“आरंभ”

Punit said...

भई बाकी सब तो ठीक है लेकिन बच्चे वही सीखते हैं जो अपने आसपास देखते हैं। जब उनकी मम्मिओं ने कभी चुनरिया नहीं लहराई तो बच्चियाँ तो फ़िर कुछ और लहरायेंगी ही ना।
वैसे सावन की बात चली ही है तो एक सलाह है मेरी सबको। दिलजले मिशनरी आशिकों से एक सुरक्षित दूरी बना कर रखें। सावन का महीना डेंगू, मलेरिया के साथ साथ कुछ और भी सन्क्रामक बीमारियाँ साथ लाता है। वैसे बाकी सब ठीक ही है…

notepad said...

"पूस की रात" सिर्फ़ प्रेमचन्द जैसों को याद रह जाती है कभी उस पर फ़िल्म बने तो शायद पूस भी फ़ेमस हो जाए ।मीडिया तो बहुत बडा रोल प्ले कर रहा है अवधारणाओं और मूल्यों के निर्माण में ।

अरुण said...

ये गलत बात है गुरुदेव् जी आप आजकल् हर जगह कमिया ढूढते रह्ते है..बाईक पर पीछे बैठी लडकी का स्कार्फ या फिर उसके डिजाईनर कुरते कै उडते हुये हिस्सो के बारे मे जानकारी देकर भी समझा सकते थे..आईंदा से अगर आपको कोई ऐसे सवाल पूछे चेले का प्रयोग करे सीधे हमारा पता दे दे.हम भविष्य मे इसतरह के क्रैश कोर्स् भी चलने जा रहे है..:)

anitakumar said...

Alok ji
sabse pehle toh aap apne chele Arun ji ko kutch path padha dein....humesha aapki ungali pakad ker hi chalte hain...aapka reject maal, aapke paas koi swaal pooche toh unke paas crash course ko bhejne ki derkaar....khud ka koi prayaas nahi...ha ha ha ha ha
Waise ladki ne sahi aadmi se swaal kiye hain..ab chunnari(jiska doosera naam lajwanti bhi hai)jaise puraane fashion ke baare mein Alok uncle ko hi pataa hoga na ..after all unke zamaane ki cheeze hai...ladki ki maa ke zamaane ki nahi ..aur yeh master ji filmeyein bahut dekhte hain..tabhi toh her cheeze samjhaane ke liye filmon ka sahaara lena padhta hai

anitakumar said...

i hope arun ji meri tippani ka bura nahi maanege

अनूप शुक्ला said...

सही सवाल! जवाब भी ठीक है। क्या पाण्डेयजी का कयास सहीस है?

Sanjeet Tripathi said...

गज़ब हो यार आप भी, ये कन्याएं डेटिंग के दौरान बहुत भेजा खाती है उटपटांग सवाल पूछ पूछ कर इसलिए मैने उन्हे आपका पता दे दिया था कि ये सब सवाल जा के आलोक अंकल से पूछा करो, और आप हो कि उन्हें ऐसे जवाब दे दे देते हो!
अब से ज्ञान दद्दा का पता देना पड़ेगा इन कन्याओं को!

Isht Deo Sankrityaayan said...

लगता है बालिका ने आपसे पूछा तो और भी बहुत कुछ था पर बता नहीं रहे हैं. और हाँ ये रामगोपाल वर्मा के नाम आपने बैसाख ही क्यों किया भाई!